ऑपरेशन सिंदूर पर लोकसभा में गरमाई बहस: पीएम मोदी ने विपक्ष के सवालों का दिया कड़ा जवाब

ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में चर्चा, मोदी की स्पष्ट रणनीति

“लोकसभा में दो दिनों तक चली बहस के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर पर विपक्ष के आरोपों का तथ्यपूर्ण और आक्रामक जवाब दिया। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत विजयोत्सव की घोषणा से की, जिसमें उन्होंने कहा कि यह उत्सव भारत की सेना की बहादुरी और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का प्रतीक है।”


पीएम मोदी का पहला वार: आतंकवादियों को मिली सज़ा

प्रधानमंत्री ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि पहलगाम में हुए हमले के बाद सेना को पूरी छूट दी गई थी और 22 अप्रैल को सिर्फ 22 मिनट में भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई कर दी।
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकियों के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए चलाया गया, जिसमें सेना ने लक्ष्यभेदी हमले किए।


सेना के शौर्य की सराहना

मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंक के अड्डों को पूरी तरह नष्ट कर दिया।
उन्होंने कहा, "हमारे सैनिकों की कार्रवाई इतनी प्रभावशाली थी कि पाकिस्तान के कई एयरबेस आज तक
ICU में पड़े हैं।"
प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग का दौर अब समाप्त हो चुका है – भारत न झुकेगा, न रुकेगा।


अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अमेरिका का रुख

प्रधानमंत्री ने लोकसभा को यह भी जानकारी दी कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने उन्हें 9 मई को फोन किया था और बताया कि पाकिस्तान बड़ा हमला करने की तैयारी में है।
इस पर पीएम मोदी ने सख्ती से जवाब दिया: “अगर हमला हुआ तो जवाब भारी पड़ेगा, भारत गोली का जवाब गोले से देगा।”


दुनिया का समर्थन और विपक्ष की आलोचना

प्रधानमंत्री ने बताया कि दुनिया के किसी भी देश ने भारत को ऑपरेशन रोकने के लिए नहीं कहा, सिवाय तीन देशों के जिन्होंने पाकिस्तान का पक्ष लिया।

उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि :

“कुछ लोग सेना की बातों को नजरअंदाज करके पाकिस्तान के झूठ को आगे बढ़ा रहे हैं।”

यह इशारा विपक्षी नेताओं की उस मांग की ओर था जिसमें सबूत मांगे गए थे।


राहुल गांधी और कांग्रेस को मिला सीधा जवाब

विपक्ष के नेता राहुल गांधी के उस आरोप पर कि सेना को कार्रवाई की खुली छूट नहीं थी, प्रधानमंत्री ने जवाब दिया कि सेना को पहले ही दिन पूरी छूट दे दी गई थी।
उन्होंने कहा, “जो लोग सेना के पराक्रम पर सवाल उठाते हैं, उन्हें देश की भावनाओं की समझ नहीं।”


संघर्षविराम और पाकिस्तान पर कड़ा संदेश

जब विपक्ष ने संघर्षविराम पर सवाल उठाया, प्रधानमंत्री ने साफ किया कि संघर्षविराम भारत की कमजोरी नहीं थी, बल्कि एक रणनीतिक और मानवीय निर्णय था।
उन्होंने बताया कि हमला इतना प्रभावशाली था कि पाकिस्तान के डीजीएमओ को खुद फोन कर कहना पड़ा – "बस करो, बहुत मारा, कृपया हमला रोक दो।"


कांग्रेस की नीतियों पर तीखा हमला

मोदी ने पुराने उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकारें आतंकवादी हमलों के बाद भी पाकिस्तान से दोस्ती की उम्मीद रखती थीं।
उन्होंने मुंबई हमलों के बाद पाकिस्तान को ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ का दर्जा देने के फैसले को “राष्ट्रीय स्वाभिमान से खिलवाड़” बताया।
उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने यह दर्जा खत्म किया और अटारी बॉर्डर से व्यापार भी बंद किया।


सिंधु जल समझौता: भारत के हितों की अनदेखी

प्रधानमंत्री ने सिंधु जल समझौते को भी चर्चा में लाते हुए कहा कि यह भारत के स्वाभिमान के खिलाफ था।
उन्होंने कहा, “इस समझौते के तहत 80% पानी पाकिस्तान को चला जाता है, जबकि यह पानी भारत का हक है।”
इस मुद्दे पर उन्होंने कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों की तीव्र आलोचना की।


आतंकी घटनाओं में कमी के आंकड़े

प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 के बाद से देश में आतंकी घटनाओं की संख्या में भारी गिरावट आई है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की नीति साफ है – आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहनशीलता और निर्णायक कार्रवाई।


राजनीति में विपक्ष को नसीहत

अपने भाषण के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि “राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन देशहित में सभी दलों को एक होना चाहिए।”
उन्होंने चेताया कि “विपक्ष मीडिया की हेडलाइन पा सकता है, लेकिन जनता के दिलों में जगह नहीं बना सकता।”

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