PIL कॉन्सेप्ट खत्म पर बढ़ी बहस, सरकार और सुप्रीम कोर्ट आमने-सामने
भारत में PIL कॉन्सेप्ट खत्म करने को लेकर बहस तेज हो गई है। हाल ही में Supreme Court of India में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने जनहित याचिका की जरूरत पर सवाल उठाए। सरकार का कहना है कि आज के समय में अदालत तक पहुंच पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गई है। सरकार ने दलील दी कि जब PIL की शुरुआत हुई थी, तब लोगों के पास संसाधनों की कमी थी। लेकिन अब डिजिटल सुविधा, ई-फाइलिंग और ऑनलाइन सिस्टम के कारण हर व्यक्ति न्याय पा सकता है। ऐसे में PIL कॉन्सेप्ट खत्म करने पर विचार होना चाहिए।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर संतुलित रुख अपनाया है। अदालत का कहना है कि PIL अभी भी जरूरी है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल रोकना जरूरी है। कोर्ट केवल उन्हीं मामलों में नोटिस जारी करता है, जहां ठोस आधार होता है। सबरीमाला मंदिर से जुड़ा यह मामला इस बहस को और महत्वपूर्ण बना देता है। 2018 के फैसले के बाद कई रिव्यू पिटीशन दाखिल हुईं, जिन पर अब संविधान पीठ सुनवाई कर रही है।
कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि PIL कॉन्सेप्ट खत्म करने के बजाय इसमें सुधार करना बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे न्याय प्रणाली मजबूत और पारदर्शी बनेगी।
Sunil Sharma | The Morning Star
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
1. PIL क्या होती है?
PIL यानी जनहित याचिका, जिसके जरिए कोई भी व्यक्ति जनहित में कोर्ट जा सकता है।
2. PIL कॉन्सेप्ट खत्म क्यों चर्चा में है?
सरकार का मानना है कि अब इसकी जरूरत कम हो गई है और इसका दुरुपयोग भी हो रहा है।
3. सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख है?
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि PIL जरूरी है, लेकिन इसका उपयोग सावधानी से होना चाहिए।
