Railway Accident Compensation Supreme Court :- सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे दुर्घटनाओं में मुआवजे को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की ट्रेन दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है, तो केवल इस आधार पर उसके परिवार का मुआवजा दावा खारिज नहीं किया जा सकता कि मृतक के पास ट्रेन का टिकट नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि रेलवे दुर्घटना से जुड़े मामलों में प्रत्येक मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए। यदि यह साबित होता है कि मृतक रेलवे यात्रा से संबंधित दुर्घटना का शिकार हुआ था, तो केवल टिकट की अनुपस्थिति मुआवजा देने से इनकार करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकती।
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अदालत ने कहा कि रेलवे अधिनियम का उद्देश्य दुर्घटना पीड़ितों और उनके आश्रितों को राहत प्रदान करना है। इसलिए कानून की व्याख्या इस प्रकार की जानी चाहिए कि वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिल सके।
यह फैसला उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्हें पहले टिकट न होने के आधार पर मुआवजे से वंचित किया गया था। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस निर्णय से भविष्य में रेलवे दुर्घटना मुआवजा दावों की सुनवाई में पीड़ित परिवारों को राहत मिल सकती है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक मामले में परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों की अलग-अलग जांच होगी। इसका अर्थ यह नहीं है कि बिना टिकट यात्रा करने वाले हर व्यक्ति के मामले में स्वतः मुआवजा मिल जाएगा, बल्कि यह देखा जाएगा कि दुर्घटना की प्रकृति और तथ्यों के आधार पर मुआवजे का अधिकार बनता है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय रेलवे दुर्घटना पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा और मानवीय दृष्टिकोण को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।