नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2026। दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते तापमान के बीच सुपर अल नीनो 2026 को लेकर मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के पूर्वानुमान के अनुसार, प्रशांत महासागर में बढ़ती गर्मी आने वाले महीनों में वैश्विक मौसम को प्रभावित कर सकती है।
सुपर अल नीनो 2026 से क्यों बढ़ी चिंता?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है। इसके दौरान प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इससे दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में तापमान और बारिश का पैटर्न बदल सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, शक्तिशाली अल नीनो के कारण कुछ देशों में भीषण गर्मी और सूखे की स्थिति बन सकती है। वहीं, दूसरे क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
भारत में अल नीनो का संबंध मानसूनी बारिश से भी है।
कई अल नीनो वर्षों में मानसून कमजोर रहा है। हालांकि, हर बार ऐसा होना जरूरी नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम में बड़े बदलाव खेती,
जल आपूर्ति और बिजली की मांग को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए भारतीय मौसम विभाग के आधिकारिक पूर्वानुमानों पर नजर रखना जरूरी है।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: सुपर अल नीनो क्या है?
उत्तर: यह अत्यधिक शक्तिशाली अल नीनो के लिए इस्तेमाल होने वाला अनौपचारिक शब्द है।
प्रश्न 2: क्या सुपर अल नीनो 2026 से भारत में गर्मी बढ़ेगी?
उत्तर: कुछ क्षेत्रों में गर्मी बढ़ने की आशंका हो सकती है, लेकिन इसका वास्तविक असर मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
प्रश्न 3: क्या अल नीनो से बारिश कम होती है?
उत्तर: कई क्षेत्रों में बारिश घट सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर सामान्य से अधिक वर्षा भी संभव है।