ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बाज बटालियन तैयार करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इस नई पहल का उद्देश्य ड्रोन युद्ध, सीमा निगरानी और हवाई खुफिया क्षमताओं को पहले से अधिक मजबूत बनाना है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, बाज बटालियन में विशेष रूप से प्रशिक्षित जवान शामिल होंगे, जो आधुनिक ड्रोन और रिमोटली पाइलटेड एयरक्राफ्ट (RPA) का संचालन करेंगे। यह विशेष यूनिट सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखेगी और फ्रंटलाइन सैनिकों को वास्तविक समय में महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएगी। इससे किसी भी खतरे पर सेना की प्रतिक्रिया पहले से अधिक तेज और प्रभावी होगी। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी कहा है कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन तकनीक निर्णायक भूमिका निभाएगी।
इसी कारण भारतीय सेना अपनी तकनीकी क्षमता को लगातार बढ़ा रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन के साथ एलएसी पर तनाव और पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर जैसे अनुभवों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन सबसे प्रभावी हथियारों में शामिल हैं। दो वर्ष पहले भारतीय सेना के पास केवल कुछ सौ ड्रोन थे, जबकि अब उनकी संख्या 50 हजार से अधिक हो चुकी है। आने वाले वर्षों में इस संख्या को और बढ़ाने की योजना है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बाज बटालियन भारत की सीमा सुरक्षा और भविष्य की सैन्य रणनीति को नई मजबूती प्रदान करेगी।
FAQ
Q1. बाज बटालियन क्या है?
उत्तर: बाज बटालियन भारतीय सेना की विशेष ड्रोन और हवाई निगरानी इकाई होगी।
Q2. बाज बटालियन का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य सीमा सुरक्षा, ड्रोन संचालन और वास्तविक समय की खुफिया जानकारी जुटाना है।
Q3. बाज बटालियन क्यों बनाई जा रही है?
उत्तर: आधुनिक युद्धों में ड्रोन की बढ़ती भूमिका को देखते हुए यह पहल की गई है।

