Scindia Property Dispute 2026 :- सिंधिया राजघराने की करीब ₹40,000 करोड़ की संपत्ति को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद में अब 78 साल पुराना ‘द कोवेनेंट’ (The Covenant) दस्तावेज सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आया है। इसी दस्तावेज के आधार पर यह तय किया जा रहा है कि राजघराने की विभिन्न संपत्तियों पर किसका वैधानिक अधिकार बनता है।
‘द कोवेनेंट’ वर्ष 1948 में तत्कालीन ग्वालियर सहित कई रियासतों के भारतीय संघ में विलय के समय तैयार किया गया था। इसमें तत्कालीन शासकों की निजी संपत्तियों, राजकीय संपत्तियों और उनके अधिकारों का उल्लेख किया गया था। मौजूदा संपत्ति विवाद में यही दस्तावेज अदालत के लिए अहम साक्ष्य माना जा रहा है।
यह विवाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के बीच कई दशकों से चल रहा है। विवाद में महल, जमीन, ऐतिहासिक इमारतें और अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 40 हजार करोड़ रुपये बताई जाती है। हाल के दिनों में समझौते की प्रक्रिया आगे बढ़ी है, लेकिन कुछ नए दावों के कारण मामला फिर चर्चा में आ गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत के अंतिम निर्णय में ‘द कोवेनेंट’ की व्याख्या महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसी आधार पर यह तय होगा कि कौन-सी संपत्ति निजी मानी जाएगी और किस पर उत्तराधिकार का दावा स्वीकार किया जा सकता है। मामले की सुनवाई पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।