भलस्वा लैंडफिल सफाई अभियान तेज, 2026 के अंत तक कचरे का बड़ा हिस्सा हटाने का लक्ष्य

दिल्ली के सबसे बड़े कूड़ा स्थलों में शामिल भलस्वा लैंडफिल सफाई अभियान अब तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। नगर निगम (MCD) का लक्ष्य वर्ष 2026 के अंत तक इस लैंडफिल से बड़ी मात्रा में पुराने कचरे को हटाना है। इसके लिए आधुनिक बायो-माइनिंग तकनीक और मशीनों की मदद से लगातार कचरे की प्रोसेसिंग की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य केवल कूड़े के पहाड़ को कम करना नहीं, बल्कि राजधानी में प्रदूषण घटाना और पर्यावरण को बेहतर बनाना भी है।

भलस्वा लैंडफिल लंबे समय से आसपास रहने वाले लोगों के लिए दुर्गंध, धुएं और प्रदूषण का कारण बना हुआ है। अब भलस्वा लैंडफिल सफाई अभियान के तहत पुराने कचरे को अलग कर रीसाइक्लिंग योग्य सामग्री को पुनः उपयोग में लाया जा रहा है। इससे जमीन का बेहतर उपयोग संभव होगा और भविष्य में ठोस कचरा प्रबंधन भी मजबूत होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अभियान तय समय पर पूरा होता है,

तो दिल्ली के पर्यावरण पर इसका सकारात्मक असर दिखाई देगा।

स्थानीय लोगों को भी साफ-सुथरा वातावरण मिलने की उम्मीद है। नगर निगम का कहना है कि परियोजना निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ रही है और 2026 तक इसके महत्वपूर्ण परिणाम सामने आने की संभावना है।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1. भलस्वा लैंडफिल कहां स्थित है?
उत्तर: यह उत्तर-पश्चिम दिल्ली के भलस्वा क्षेत्र में स्थित प्रमुख कूड़ा निस्तारण स्थल है।

Q2. भलस्वा लैंडफिल सफाई का लक्ष्य क्या है?
उत्तर: MCD का लक्ष्य 2026 के अंत तक यहां से बड़ी मात्रा में कचरा हटाना है।

Q3. सफाई के लिए कौन-सी तकनीक अपनाई जा रही है?
उत्तर: बायो-माइनिंग और वैज्ञानिक कचरा प्रोसेसिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

Jai Sharma | The Morning Star

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