CBSE पेरेंटिंग कैलेंडर | बच्चों के बेहतर विकास की नई पहल

Central Board of Secondary Education ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए CBSE पेरेंटिंग कैलेंडर लॉन्च किया है। यह पहल National Council of Educational Research and Training और National Education Policy 2020 के तहत शुरू की गई है। इसका उद्देश्य अभिभावकों और स्कूलों के बीच बेहतर तालमेल बनाना है।

इस कैलेंडर के जरिए पेरेंट्स को बच्चों के व्यवहार और मानसिक स्थिति को समझने की ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही सोशल मीडिया और गेमिंग की लत से बचाने के उपाय भी बताए जाएंगे। आज के डिजिटल दौर में यह पहल काफी अहम मानी जा रही है।

CBSE पेरेंटिंग कैलेंडर में बच्चों की उम्र के अनुसार अलग-अलग कैटेगरी बनाई गई है। छोटे बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम कंट्रोल पर जोर रहेगा। वहीं मिडिल और सीनियर क्लास के लिए आत्मविश्वास, करियर और तनाव प्रबंधन जैसे विषय शामिल हैं।

इसके अलावा, स्कूलों में नियमित वर्कशॉप आयोजित की जाएंगी। इन वर्कशॉप में पेरेंट्स को 4R मेथड सिखाया जाएगा, जिससे बच्चों के साथ रिश्ते मजबूत बनेंगे। यह पहल बच्चों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1. CBSE पेरेंटिंग कैलेंडर क्या है?
यह एक गाइडलाइन है, जो अभिभावकों को बच्चों के विकास और व्यवहार समझने में मदद करती है।

Q2. इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य बच्चों के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास को बेहतर बनाना है।

Q3. क्या इसमें स्क्रीन टाइम से जुड़ी जानकारी भी है?
हाँ, इसमें बच्चों के स्क्रीन टाइम और गेमिंग आदतों को नियंत्रित करने के तरीके बताए गए हैं।

Q4. क्या सभी स्कूलों में इसे लागू किया जाएगा?
CBSE से जुड़े स्कूलों में इसे धीरे-धीरे लागू किया जाएगा।

Sunil Sharma | The Morning Star

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