मौसेरी बहन से शादी अवैध | हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, पत्नी को मिलेगा भरण-पोषण
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि मौसेरी बहन से शादी अवैध मानी जाएगी। अदालत ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत इस तरह का रिश्ता निषिद्ध नातेदारी में आता है, इसलिए इसे कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती।यह मामला जांजगीर-चांपा जिले से जुड़ा है, जहां एक युवक ने अपनी मौसेरी बहन से विवाह किया था। बाद में दोनों के बीच विवाद हुआ और मामला कोर्ट पहुंच गया। पहले फैमिली कोर्ट ने सामाजिक प्रथा के आधार पर इस शादी को वैध माना था।
लेकिन हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया।हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि किसी भी प्रथा को मान्यता तभी मिलती है जब वह पुरानी, लगातार चलने वाली और कानून के अनुरूप हो। इस केस में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला। इसलिए अदालत ने स्पष्ट किया कि मौसेरी बहन से शादी अवैध है और इसे शून्य घोषित किया जाता है।हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि पत्नी को भरण-पोषण का अधिकार मिलेगा। यह फैसला महिलाओं के अधिकारों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. क्या मौसेरी बहन से शादी भारत में कानूनी है?
नहीं, हिंदू विवाह अधिनियम के तहत यह निषिद्ध नातेदारी में आता है।
Q2. क्या ऐसी शादी को कोर्ट मान्यता देता है?
नहीं, जब तक कोई मजबूत परंपरा साबित न हो, इसे अवैध माना जाता है।
Q3. क्या पत्नी को अधिकार मिलते हैं?
हाँ, भले ही शादी अवैध हो, पत्नी को भरण-पोषण का अधिकार मिलता है।

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