E20 Fuel :- E-20 फ्यूल क्या है? जानिए इसकी शुरुआत कहां से हुई और भारत इसे क्यों दे रहा है बढ़ावा

E20 Fuel :- नई दिल्ली। भारत में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित E-20 फ्यूल का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। सरकार का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को घटाना है। हालांकि कई लोगों के मन में यह सवाल है कि आखिर E-20 फ्यूल का विचार सबसे पहले कहां से आया और दुनिया के दूसरे देश किस स्तर तक एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग करते हैं।

E-20 फ्यूल का मतलब है ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिला हो। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाने वाला जैव ईंधन (Biofuel) है। यह पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में अपेक्षाकृत कम प्रदूषण फैलाता है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद करता है।

Mumbai Rain :- महाराष्ट्र में बारिश का कहर, मुंबई में जनजीवन बेहाल, 13 की मौत, नासिक में बादल फटने जैसे हालात का अलर्ट

दुनिया में एथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग की शुरुआत सबसे पहले ब्राजील ने बड़े पैमाने पर की थी। 1970 के दशक में तेल संकट के बाद ब्राजील ने गन्ने से बनने वाले एथेनॉल को पेट्रोल के विकल्प के रूप में अपनाया। आज भी वहां अधिकांश वाहनों में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग किया जाता है और कई वाहन पूरी तरह एथेनॉल पर भी चल सकते हैं। इसके बाद थाईलैंड और कुछ अन्य देशों ने भी एथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा देना शुरू किया। वहीं अमेरिका में आमतौर पर E-10 और कुछ क्षेत्रों में E-15 ईंधन का उपयोग किया जाता है।

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाया है। सरकार का लक्ष्य देशभर में E-20 ईंधन की उपलब्धता बढ़ाना और नई पीढ़ी के ऐसे वाहनों को प्रोत्साहित करना है जो इस ईंधन के अनुरूप बनाए गए हों। इससे पेट्रोल आयात पर खर्च कम होने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि E-20 फ्यूल पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि पुराने वाहनों में इसके उपयोग को लेकर वाहन निर्माता कंपनियों के दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी है। इसलिए वाहन मालिकों को अपने वाहन की अनुकूलता की जांच करने के बाद ही E-20 फ्यूल का नियमित उपयोग करना चाहिए।

सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन के विस्तार से ऊर्जा आत्मनिर्भरता मजबूत होगी, किसानों को नया बाजार मिलेगा और भविष्य में स्वच्छ ईंधन की दिशा में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।

Please Read and Share