अल नीनो प्रभाव से भारत में कमजोर पड़ सकता है मानसून, किसानों की बढ़ी चिंता
प्रशांत महासागर में सक्रिय हुए अल नीनो प्रभाव को लेकर संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, अल नीनो प्रभाव के कारण भारत सहित एशिया के कई देशों में मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। इसका सीधा असर कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर पड़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कम बारिश की स्थिति में धान और मक्का जैसी खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। भारत की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है, इसलिए कमजोर मानसून किसानों के लिए चुनौती बन सकता है। एफएओ की रिपोर्ट बताती है कि सूखे की संभावना बढ़ने से खेतों में नमी कम होगी और फसलों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट में भारत, पाकिस्तान, थाईलैंड, वियतनाम, फिलीपींस और इंडोनेशिया समेत कई देशों में जल संकट और कृषि जोखिम बढ़ने की चेतावनी दी गई है। वर्ष 2015-16 के अल नीनो के दौरान भारत में मक्का और धान उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई थी। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बार वैश्विक तापमान अधिक होने के कारण स्थिति और गंभीर हो सकती है।
FAQ
प्रश्न: अल नीनो प्रभाव क्या है?
यह प्रशांत महासागर में समुद्री तापमान बढ़ने से बनने वाली जलवायु घटना है, जो वैश्विक मौसम को प्रभावित करती है।
प्रश्न: अल नीनो प्रभाव का भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
इससे मानसून कमजोर हो सकता है और कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
प्रश्न: किन फसलों पर सबसे अधिक असर होगा?
धान, मक्का और अन्य वर्षा आधारित खरीफ फसलें सबसे अधिक प्रभावित हो सकती हैं।
