FATF उपाध्यक्ष | भारत की बढ़ी वैश्विक ताकत, पाकिस्तान पर बढ़ेगा दबाव
भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) में भारत के वरिष्ठ अधिकारी विवेक अग्रवाल को FATF उपाध्यक्ष चुना गया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब दुनिया भर में आतंकवाद की फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाता रहा है और FATF उपाध्यक्ष पद पर भारतीय प्रतिनिधित्व को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। पेरिस स्थित FATF एक वैश्विक संस्था है, जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक तय करती है। विदेश मंत्रालय ने इस उपलब्धि को भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की मजबूती से जोड़कर देखा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि FATF उपाध्यक्ष बनने से भारत की आवाज वैश्विक मंचों पर और प्रभावी होगी। हालांकि, FATF में किसी भी देश के खिलाफ कार्रवाई सामूहिक सहमति और तकनीकी मूल्यांकन के आधार पर ही होती है। इसलिए भारत अकेले किसी देश को ग्रे लिस्ट में नहीं डाल सकता। पाकिस्तान पहले कई बार FATF की ग्रे लिस्ट में रह चुका है। ऐसे में भारत की बढ़ी हुई भूमिका आतंकवाद से जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी को और मजबूत कर सकती है। विवेक अग्रवाल का अनुभव भी FATF की नीतियों को प्रभावी बनाने में अहम माना जा रहा है।
FAQ
Q1. FATF क्या है?
FATF एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए काम करती है।
Q2. FATF उपाध्यक्ष कौन बने हैं?
भारत के वरिष्ठ अधिकारी विवेक अग्रवाल FATF के उपाध्यक्ष चुने गए हैं।
Q3. क्या भारत अब पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल सकता है?
नहीं, FATF के सभी निर्णय सदस्य देशों की सामूहिक सहमति से लिए जाते हैं।
Q4. पाकिस्तान का FATF से क्या संबंध रहा है?
पाकिस्तान कई बार FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल हो चुका है।
Q5. भारत के लिए यह उपलब्धि क्यों महत्वपूर्ण है?
इससे आतंकवाद विरोधी मुद्दों पर भारत की वैश्विक भूमिका और प्रभाव बढ़ेगा।
