गंगा तट विकास योजना से बदलेगी बिहार की तस्वीर, पर्यटन और संस्कृति को मिलेगा नया आयाम

बिहार सरकार की गंगा तट विकास योजना राज्य में पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को गंगा किनारे पर्यटन, मनोरंजन और सांस्कृतिक केंद्र विकसित करने के निर्देश दिए हैं। इस गंगा तट विकास योजना के तहत जेपी गंगा पथ को केवल सड़क परियोजना नहीं, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि पटना सहित गंगा तट के प्रमुख क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने निरीक्षण भवनों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से आधुनिक अतिथि गृहों में बदलने का सुझाव भी दिया है। इससे विभागीय परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग होगा और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। इसके अलावा कुर्जी घाट से काली घाट तक समेकित विकास योजना तैयार की जाएगी। हरित क्षेत्रों, पार्कों और नागरिक सुविधाओं का विस्तार भी किया जाएगा। जेपी गंगा पथ पर एक लाख पौधरोपण का लक्ष्य तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा तट विकास योजना के सफल क्रियान्वयन से बिहार की पर्यटन क्षमता को नई उड़ान मिलेगी। साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसर भी बढ़ेंगे।

FAQ

प्रश्न 1: गंगा तट विकास योजना क्या है?
उत्तर: यह बिहार सरकार की योजना है, जिसके तहत गंगा किनारे पर्यटन, सांस्कृतिक और मनोरंजन केंद्र विकसित किए जाएंगे।

प्रश्न 2: जेपी गंगा पथ को कैसे विकसित किया जाएगा?
उत्तर: इसे पर्यटन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और नागरिक सुविधाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

प्रश्न 3: PPP मॉडल का क्या उपयोग होगा?
उत्तर: निरीक्षण भवनों को आधुनिक गेस्ट हाउस में बदलने और उनके बेहतर संचालन के लिए PPP मॉडल अपनाया जाएगा।

Prem Chand | The Morning Star

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