अमेरिकी टैरिफ से अप्रभावित रहेगा भारतीय फार्मा उद्योग: डॉ. एन.के. गांगुली

अमेरिकी टैरिफ से नहीं डगमगाएगा भारतीय फार्मा सेक्टर: डॉ. एन.के. गांगुली

भारतीय फार्मा उद्योग, जो दुनिया की लगभग 80% जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करता है, अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए टैरिफ से अप्रभावित रहेगा। यह कहना है भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के पूर्व महानिदेशक डॉ. एन.के. गांगुली का।”


टैरिफ बढ़ाने का नुकसान उसी देश को होता है

डॉ. गांगुली का मानना है कि अगर कोई देश टैरिफ बढ़ाता है तो उसका वास्तविक नुकसान उसी देश को होता है। उन्होंने कहा, “भारत सस्ती दवाएं बनाता और निर्यात करता है, जबकि अमेरिका और यूरोप में दवाओं के दाम बहुत अधिक हैं। वहां जेनेरिक दवाओं का उत्पादन नहीं होता, क्योंकि इसके लिए अधिक श्रम, फैक्ट्री और लागत की जरूरत होती है।”


भारत सबसे सस्ती दवाएं उपलब्ध कराता है

भारत पूरी दुनिया में सबसे किफायती दवाएं उपलब्ध कराता है। डॉ. गांगुली के अनुसार, “टैरिफ बढ़ाने से भारत को नुकसान नहीं होगा, बल्कि टैरिफ लगाने वाले देश के लोगों को महंगी दवाएं खरीदनी पड़ेंगी।”
भारत ने जीवनरक्षक दवाओं पर टैरिफ कम कर दिया है ताकि ज़रूरतमंद देशों को उन्हें आसानी से उपलब्ध कराया जा सके।


अमेरिकी बाजार में ड्यूटी लागू

7 अगस्त से अमेरिकी बाजार में भारतीय सामानों पर 25% शुरुआती ड्यूटी लागू हो चुकी है। 27 अगस्त से अतिरिक्त शुल्क भी लगना शुरू हो जाएगा, जिससे झींगा, ऑर्गेनिक केमिकल्स, कालीन और परिधान जैसे उत्पाद महंगे हो जाएंगे।


भारत में दवाएं क्यों सस्ती हैं?

भारत में दवाएं सस्ती होने का मुख्य कारण दवा निर्माण के लिए अपनाई गई मूल्य निर्धारण नीति है। सरकार कई योजनाएं चलाती है, जैसे ‘प्रधानमंत्री जन औषधि योजना’, जिसके तहत सरकारी फार्मेसियों में सस्ती दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

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