नगर निगम मतदाता सूची विवाद पर यूपी कांग्रेस के आरोपों का मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने किया खंडन

नगर निगम मतदाता सूची विवाद पर यूपी कांग्रेस के आरोपों का मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने किया खंडन

“उत्तर प्रदेश कांग्रेस द्वारा वाराणसी की एक मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाने और इसे “वोट चोरी” का मामला बताते हुए चुनाव आयोग पर निशाना साधने के बाद, मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ), उत्तर प्रदेश ने इन दावों को अनुचित करार दिया है।”


कांग्रेस का दावा

कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक फोटो साझा करते हुए कहा कि वाराणसी की मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति ‘राजकमल दास’ के नाम पर 50 बेटों के नाम दर्ज हैं। इनमें सबसे छोटे की उम्र 28 साल और सबसे बड़े की उम्र 72 साल बताई गई है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग इसे सिर्फ "त्रुटि" कहकर टालेगा या फर्जीवाड़ा मानेगा।


सीईओ का जवाब

यूपी सीईओ ने स्पष्ट किया कि यह मतदाता सूची नगर निगम निर्वाचक नामावली है, न कि लोकसभा या विधानसभा की सूची। उन्होंने बताया कि लोकसभा और विधानसभा की सूचियों में मतदाताओं की फोटो होती है, जबकि इस सूची में ऐसा नहीं है।
सीईओ ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद
324 के तहत लोकसभा और विधानसभा की सूची तैयार करने का काम भारत निर्वाचन आयोग का है, जबकि अनुच्छेद 243243 य क के तहत नगर निकायों की सूची तैयार करना राज्य निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है।


चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराना अनुचित

सीईओ ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल होते हुए भी उसने नगर निकाय की त्रुटि के लिए भारत निर्वाचन आयोग को जिम्मेदार ठहराया, जो नैतिक रूप से सही नहीं है।


“हाल के महीनों में कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने महाराष्ट्र, बिहार और अब उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इस मामले में यूपी सीईओ ने स्पष्ट कर दिया है कि यह विवाद लोकसभा या विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची से जुड़ा नहीं है।”

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