Infrastructure News :- भारत और ईरान के बीच रणनीतिक महत्व वाली चाबहार–जाहेदान रेलवे परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत लगभग 700 किलोमीटर लंबे चाबहार–जाहेदान रेल कॉरिडोर को पुनर्जीवित करने की तैयारी कर रहा है। यदि इस परियोजना पर दोबारा काम शुरू होता है, तो इससे भारत की मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच मजबूत होगी तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई गति मिलने की उम्मीद है।
चाबहार बंदरगाह भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजना मानी जाती है। यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान के रास्ते पर निर्भर हुए बिना ईरान, अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक माल पहुंचाने का वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराता है। प्रस्तावित चाबहार–जाहेदान रेलवे इसी बंदरगाह को ईरान के आंतरिक रेल नेटवर्क से जोड़ने के उद्देश्य से तैयार की गई थी।
यह रेल कॉरिडोर पूरा होने के बाद ईरान के रेल नेटवर्क के माध्यम से मध्य एशिया और आगे यूरोप तक माल परिवहन की सुविधा को और मजबूत करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) भी अधिक प्रभावी बन सकेगा, जिससे भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापारिक लागत और समय दोनों में कमी आ सकती है।
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रिपोर्टों के अनुसार, परियोजना पर पहले भी भारत और ईरान के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से इसकी प्रगति धीमी पड़ गई थी। अब पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक हालात और क्षेत्रीय व्यापारिक संभावनाओं को देखते हुए इस परियोजना को फिर से गति देने की संभावना जताई जा रही है।
विश्लेषकों का कहना है कि चाबहार बंदरगाह और उससे जुड़ा रेल नेटवर्क भारत की “कनेक्ट सेंट्रल एशिया” नीति का अहम हिस्सा है। इसके माध्यम से भारत न केवल व्यापारिक हितों को मजबूत कर सकेगा, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग के नए अवसर भी विकसित होंगे।
हालांकि, अभी तक भारत सरकार या संबंधित एजेंसियों की ओर से इस परियोजना को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल यह जानकारी मीडिया रिपोर्टों के आधार पर सामने आई है। यदि परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो यह भारत-ईरान संबंधों और क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।s