राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन को मंजूरी, 10,103 करोड़ रुपये से बढ़ेगा तिलहन उत्पादन
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन को वर्ष 2024-25 से 2030-31 तक के लिए 10,103 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य देश में तिलहन उत्पादन बढ़ाकर खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में जानकारी देते हुए बताया कि यह मिशन मुख्य रूप से रेपसीड-सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी और तिल जैसी प्रमुख तिलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ाने पर केंद्रित रहेगा। इसके साथ ही बेहतर बीज, आधुनिक कृषि तकनीक और प्रसंस्करण क्षमता को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2022-23 में 390 लाख टन के स्तर से तिलहन उत्पादन को बढ़ाकर वर्ष 2030-31 तक 697 लाख टन तक पहुंचाना है। मिशन के तहत जीनोम संपादन जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उच्च गुणवत्ता वाले बीज विकसित किए जाएंगे, जिससे किसानों को अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन से खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश के कृषि क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन का बजट कितना है?
उत्तर: इस मिशन के लिए केंद्र सरकार ने 10,103 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
Q2. मिशन किन फसलों पर केंद्रित है?
उत्तर: रेपसीड-सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी और तिल जैसी तिलहन फसलें शामिल हैं।
Q3. मिशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: भारत को खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाना और तिलहन उत्पादन बढ़ाना।
Q4. वर्ष 2030-31 तक उत्पादन का लक्ष्य कितना है?
उत्तर: 697 लाख टन तिलहन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
रिपोर्ट: Sunil Sharma | The Morning Star

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