नेतन्याहू लेबनान नीति पर कायम, सुरक्षा के नाम पर सेना हटाने से किया इनकार
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बार फिर अपनी नेतन्याहू लेबनान नीति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना को फिलहाल नहीं हटाया जाएगा। उनके अनुसार, जब तक सुरक्षा खतरे पूरी तरह समाप्त नहीं होते, तब तक सेना की तैनाती जारी रहेगी। यरुशलम में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान नेतन्याहू ने अमेरिका और इजरायल के संबंधों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कई लोग मानते हैं कि इजरायल अमेरिका के निर्देशों पर चलता है, लेकिन यह पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि इजरायल एक स्वतंत्र राष्ट्र है और अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेता है।
नेतन्याहू लेबनान नीति के तहत उन्होंने यह भी दोहराया कि इजरायल का विवाद लेबनान से नहीं बल्कि ईरान समर्थित हिजबुल्लाह संगठन से है। उनका कहना है कि यदि हिजबुल्लाह इजरायली सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करना बंद कर दे तो दोनों देशों के बीच शांति की संभावना बन सकती है। नेतन्याहू ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इजरायल किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। इसी कारण सुरक्षा और सैन्य तैयारियों को लगातार मजबूत किया जा रहा है। वशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू लेबनान नीति आने वाले समय में मध्य पूर्व की राजनीति को प्रभावित कर सकती है। दक्षिणी लेबनान में सेना बनाए रखने का फैसला क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा सकता है, जबकि इजरायल इसे अपनी सुरक्षा जरूरतों से जोड़कर देख रहा है।
FAQ
प्रश्न 1: नेतन्याहू ने सेना हटाने से इनकार क्यों किया?
उत्तर: उनका कहना है कि दक्षिणी लेबनान क्षेत्र में सुरक्षा खतरे अभी भी मौजूद हैं।
प्रश्न 2: इजरायल का विवाद किससे है?
उत्तर: इजरायल का मुख्य विवाद हिजबुल्लाह संगठन से है, न कि लेबनान से।
प्रश्न 3: ईरान पर नेतन्याहू का क्या रुख है?
उत्तर: उन्होंने कहा कि इजरायल ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।
प्रश्न 4: क्या लेबनान के साथ शांति संभव है?
उत्तर: नेतन्याहू के अनुसार, यदि हिजबुल्लाह खतरा पैदा करना बंद करे तो शांति का रास्ता खुल सकता है।
