रामलला चढ़ावा चोरी विवाद के बीच विहिप की अहम बैठकें स्थगित, अयोध्या में बढ़ी पारदर्शिता की मांग

अयोध्या में सामने आए रामलला चढ़ावा चोरी मामले की गूंज अब विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की शीर्ष बैठकों तक पहुंच गई है। इसी के चलते 25 से 29 जून तक प्रस्तावित केंद्रीय प्रबंध समिति और केंद्रीय न्यासी मंडल की बैठकें फिलहाल स्थगित कर दी गई हैं। संगठन ने इसके पीछे अपरिहार्य कारण बताए हैं, लेकिन धार्मिक और सामाजिक हलकों में इस फैसले को हालिया विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार, इन बैठकों में देश और विदेश से 300 से अधिक पदाधिकारी शामिल होने वाले थे। बैठक के एजेंडे में संगठनात्मक योजनाओं के साथ-साथ रामलला चढ़ावा चोरी मामले पर चर्चा भी प्रस्तावित थी। सूत्रों का कहना है कि दानपात्रों की सुरक्षा व्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर गंभीर विमर्श होने वाला था।

इससे पहले हरिद्वार में हुई मार्गदर्शक मंडल और उच्चाधिकार समिति की बैठकों में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा था। कई संतों और धार्मिक नेताओं ने मंदिर से जुड़े वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच की मांग की है। धार्मिक संगठनों का मानना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े हर रुपये का पारदर्शी हिसाब होना चाहिए। यही कारण है कि रामलला चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग लगातार बढ़ रही है।

FAQ

Q1. रामलला चढ़ावा चोरी मामला क्या है?
अयोध्या में रामलला मंदिर के दानपात्रों से कथित चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया है।

Q2. विहिप की बैठकें क्यों स्थगित हुईं?
संगठन ने अपरिहार्य कारण बताए हैं, हालांकि विवाद को भी प्रमुख कारण माना जा रहा है।

Q3. बैठक में कितने लोग शामिल होने वाले थे?
देश-विदेश से 300 से अधिक पदाधिकारियों को आमंत्रित किया गया था।

Prem Chand | The Morning Star

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