Sonam Wangchuk Hunger Strike :– सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने अपने अनशन को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा है कि वह अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए केंद्र सरकार को उनकी ओर से रखी गई शर्तों पर सकारात्मक निर्णय लेना होगा। इस संबंध में उन्होंने सरकार को एक पत्र भी भेजा है, जिसमें विशेष रूप से पेपर लीक विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की गई है।
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों के समर्थन में अनशन पर बैठे हैं। उनका कहना है कि लाखों मेहनती छात्रों का भविष्य बार-बार पेपर लीक जैसी घटनाओं से प्रभावित हो रहा है, लेकिन दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने सरकार से अपील की है कि छात्रों को अपराधी की तरह देखने के बजाय उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए।
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सरकार को लिखे अपने पत्र में वांगचुक ने कहा कि यदि पेपर लीक के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं पर दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने का आश्वासन दिया जाता है तथा उनके भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है, तो वह अपना अनशन समाप्त करने को तैयार हैं। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य की रक्षा करना है।
वांगचुक ने यह भी कहा कि देश के युवाओं का सरकार और परीक्षा प्रणाली पर विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि लगातार पेपर लीक होते रहेंगे और विरोध करने वाले छात्रों पर ही कार्रवाई होगी, तो इससे शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा। उन्होंने निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली, पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई।
इस बीच पेपर लीक का मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है और शिक्षा मंत्री से जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि पेपर लीक मामलों में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कई सुधार लागू किए जा रहे हैं। ऐसे माहौल में सोनम वांगचुक का यह पत्र और अनशन समाप्त करने की सशर्त सहमति राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सकारात्मक संवाद होता है तो छात्रों से जुड़े इस विवाद का समाधान निकल सकता है। फिलहाल सभी की नजर सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है कि वह वांगचुक की मांगों पर क्या फैसला लेती है। वहीं, छात्र संगठनों ने भी स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।