भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। देश की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता 300 गीगावाट के आंकड़े को पार कर चुकी है। यह उपलब्धि वर्ष 2030 तक निर्धारित 500 गीगावाट के लक्ष्य का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, देश की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में अब गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 54 प्रतिशत से अधिक हो गई है। इसमें सौर ऊर्जा सबसे बड़ा योगदान दे रही है। वर्तमान में भारत में लगभग 165 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित हो चुकी है।
सरकार लगातार सौर, पवन, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता में और तेज़ वृद्धि देखने को मिल सकती है।
ऊर्जा क्षेत्र में यह बदलाव न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी। जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और भारत हरित ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर आगे बढ़ेगा।
भारत सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, रूफटॉप सोलर योजना और बड़े सोलर पार्क जैसी कई परियोजनाएं शुरू की हैं।
इन योजनाओं से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
Sunil Sharma | The Morning Star
FAQ
1. भारत की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता कितनी हो गई है?
भारत की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता 300 गीगावाट से अधिक हो चुकी है।
2. वर्ष 2030 तक भारत का लक्ष्य क्या है?
भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
3. भारत में सबसे बड़ा स्वच्छ ऊर्जा स्रोत कौन सा है?
सौर ऊर्जा भारत का सबसे बड़ा स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है, जिसकी क्षमता लगभग 165 गीगावाट है।
4. गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी कितनी है?
देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता में इनकी हिस्सेदारी 54 प्रतिशत से अधिक है।