ग्रेट निकोबार परियोजना पर बढ़ी बहस, विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की चुनौती

भारत की महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। केंद्र सरकार इस परियोजना को समुद्री व्यापार, रणनीतिक सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मानती है। वहीं पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इससे देश के सबसे संवेदनशील द्वीपीय पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ सकता है। ग्रेट निकोबार परियोजना के तहत अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, आधुनिक टाउनशिप और बिजली उत्पादन संयंत्र विकसित किए जाने हैं। यह परियोजना मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित ग्रेट निकोबार द्वीप को वैश्विक व्यापार केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

हालांकि पर्यावरणविदों ने वन कटाई, कोरल रीफ, मैंग्रोव और लेदरबैक समुद्री कछुओं के प्राकृतिक आवास पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य जैव विविधता को प्रभावित कर सकते हैं। दूसरी ओर सरकार का दावा है कि परियोजना में पर्यावरण संरक्षण के सभी आवश्यक उपाय शामिल किए गए हैं। साथ ही क्षतिपूरक वनीकरण और वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम भी लागू किए जाएंगे। इस बीच ग्रेट निकोबार परियोजना विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की राष्ट्रीय बहस का प्रमुख विषय बन गई है।

FAQ

प्रश्न: ग्रेट निकोबार परियोजना क्या है?
उत्तर: यह अंडमान-निकोबार में प्रस्तावित एक मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना है।

प्रश्न: पर्यावरणविद इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?
उत्तर: उन्हें वन कटाई और जैव विविधता पर संभावित प्रभाव की चिंता है।

प्रश्न: सरकार का क्या कहना है?
उत्तर: सरकार का दावा है कि परियोजना पर्यावरणीय नियमों का पालन करते हुए विकसित की जाएगी।

Prem Chand | The Morning Star

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